Tamanna/ तमन्ना Poem by Varsha M

Tamanna/ तमन्ना

तमन्ना थी छोटा सी
की जी लूं पूरी
ज़िन्दगी आपनी
शम्मा के लो तले।।

पर अनजान थी मैं
ये ज़िन्दगी है
निराली सही
कुछ खट्टी कुछ प्यारी।।

पल भर में रुलाती
तो वहीं खुशियां गहरी
ज़िंदगी को गुलज़ार करती
ले चलती हमे आगे एक और पंक्ति ।।

नन्ही सी प्यारी सी एहसास से
जो ये शुरु होती, फिर रुकती नहीं
बस बुनती जाती, तानाशाही
कुछ खट्टी कुछ मीठी।।

तमन्ना थी छोटी सी मेरी
लो आज बनन गायी
जोशी-ए-हिम्मत का वृक्ष
और दूसरो का बसेरा भी।।

मेरी एक तमन्ना
छोटी सी तमन्ना
आज रंग लई
जम के।।

Tamanna/ तमन्ना
Monday, January 4, 2021
Topic(s) of this poem: happiness,hope
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It all begins with a little desire that hopes to see better and better until best is reaped.
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