दिली तमन्ना
गुरूवार, २० जनवरी २०२२
मेरे दिल में ये है तमन्ना
हमेशा करता रहा प्रार्थना
कुर्बान हो जाऊं, मर मिट जाउ
पर आंच ना आने पाऊं।
तेरे आँचल पर गंदे हाथ ना पड़े
कई योद्धा तेरे लिए लड़ पड़े
यदि सर भी कटाना पड़े तो मंजूर है
पर मर्दानगी की शरम मंजूर नहीं है।
जब दिन थे बुरे तब भी डटे रहे
आसमान मे तेरी जयजयकार करते रहे
तिरंगे को ऊपर उठाये रखे
शान-बान को हमेशा बचाये रहे।
ना कल भी कमजोर थे
ना आज भी कम जोश है
समशेर आज भी चमकती है
बाजुए फड़कती है ओर ललकारती है।
ना समजे कोई हमें लड़ाईखोर
हम कभी नहीं रहे आदमखोर
'शांति और अमन' रहा हमारा पयगाम
नहीं लगाते हम उसका कोइ दाम।
मशगूल है और मशहूर भी
चमकते सितारे और दिल में रखे हुर भी
फर्ज और कर्ज हमारा ईमान है
मर मिटनेका अरमान और साथ में सन्मान है।
हमें हर बार मौक़ा देना अय वतन
कर देंगे कुर्बान, हम तन
देश है तो हम है
शान है तो मान है।
हम तो चले जाएंगे
शान-बान पीछे छोड़ जाएंगे
हिफाजत करना आप का काम है
आज का समय स्वर्णिम है।
डॉ. हसमुख मेहता
साहित्यिकी
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Charita Cortan Super👌👌👌👌