तेरी मुस्कान
मंगलवार, १० दिसंबर २०१९
बिखेर देती हो मुस्कान
कर देती हो दूर थकान
मायूसी दूर हो जाती मन
चुस्ती आ जाती है तन।
मन मेरा प्रफुल्लित हो जाता
पाँव में थिरकन ला देता
उँगलियों में अजीब सी हलचल
गुनगुनाता चल, लिखता जा, आगे चल।
मेरी आँखों के सामने चेहरा तेरा आ जाता
बस में धीरे से बोल देता
बस यूँही आती रहो, मुस्कुराती रहो
में जीवन में रंग बिखेरती रहो।
स्पर्श मात्र से ही रोमांचित हो जाता दिल
ह्रदय के हर तार हो जाते मिल
ये क्या खुबसूरत नजारा है
मेरा मकसद और किनारा है।
ना तुम आती, ना हम जागते
बस यूँही रहते भागते
कोई मुकाम नहीं कोई आसरा नहीं
ये मासूम को कोई सहारा नहीं।
जीवन ही उज्जवल हो गया
सब दुखों से छुटकारा पा गया
अपने आप में विस्मित भी हो गया
तेरी चाहत ने कहाँसे कहाँ ला दिया।
हसमुख मेहता
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दिल को जो छू ले तस्वीर वही है।.. dhiraj kishan