मैं तेरा बच्चा हूं माँ -Translation Of 'i Am Your Baby Mum' By Ankit Raj Goyal Poem by Dr. Antony Theodore

मैं तेरा बच्चा हूं माँ -Translation Of 'i Am Your Baby Mum' By Ankit Raj Goyal

Rating: 5.0

मैं तेरा बच्चा हूं माँ - Poem by Ankit Raj Goyal
मैं तेरा बच्चा हूँ माँ
मैं खुद से नहीं आया हूँ माँ
भगवान के फरिश्ते उड़ के आए थे कोक में तेरी
दूर मेहरबा जन्नत से कहीं
और चुपके से मुझे सोंप के चले गए थे कोक में तेरी

मैं खुद से नहीं आया हूँ माँ
भगवान की मर्जी का भेजा हुआ हूँ मैं माँ

मैं बहुत खुश था मेरे नए प्यार के पालने में
तेरी पाक कोक के झूले में
और सो रहा था वही, सुकून की लहरों में
फरिश्ते देख रहे थे
इबादत कर रहे थे
मेरी महफूतियत की
इस कायनात में मेरे जन्म की

वे पैदाइश के पाक नगमें गा रहे थे
मेरे मुबारक जन्म पर अपने सुनहरे बाजों पे बजाने को

जब मैं सोया हुआ था कोक में तेरी
फरिश्ते आते थे आहिस्ता से
मेरी प्यारी माँ, ये बात नहीं इल्म में तेरी

मैं खुश था पैदा होने को
तेरा प्यारा अजीज बच्चा बनने को

मैं हंसना चाहता था
गाना चाहता था
मैं खेलना चाहता था
तेरी छाती से दूध पीना चाहता था
जब तक तू खुश ना हो जाए
मैं तेरे चेहरे की मुस्कुराहट देखना चाहता था
जब मैं तेरी छाती से तेरा सारा दूध पी लूँ

तेरी कोक में वो मेरे सपने थे माँ
मगर उस जालिम दिन
तूने मुझे खत्म करने का फैसला कर लिया

हेडस के शैतानों को
तेरे फैसले की खबर लग गई
वो अपने सबसे तेज नगाड़े ले आए
अपनी शैतानी धुन में लगे बजाने
सारे शैतान इकट्ठे हो गए
और गोल गोल लगे नाचने
कूदते हुए गाते हुए
वो कतारों में नाचे
वो गोलों में नाचे
वो पंजों पर नाचे
वो अपने सरों के बल नाचे
वो अपने जंगली गाने गा रहे थे
और नगाड़े ढोल बजा रहे थे
पूरी जहन्नुम खुश थी
कि तुम मेरी साँस रोक रही हो

तुम्हें पता है मैं कितना रोया था?
तुम्हें पता है फरिश्ते कितना रोए थे?
क्या तुम्हें पता है कि पूरी जन्नत कैसे रोई थी
तुम्हारी पाक कोक में मेरी मौत के दिन?


उस आखिरी लम्हें में, मेरी दर्दनाक हत्या से पेहले
मैंने खुद सबसे ताकतवर भगवान को रोते देखा, बेसहारा अकेले

This is a translation of the poem I Am Your Baby Mum by Dr. Antony Theodore
Ankit Raj Goyal
Topic(s) of this poem: angels, crime, evil, god, heaven, helplessness, innocence, love, mother and child

Wednesday, September 20, 2017
Topic(s) of this poem: god,love,mother and child
COMMENTS OF THE POEM
Bhargabi Dei Mahakul 20 September 2017

There is expression of innocence and helplessness. The foetus from early growth in womb. Request of baby to mum to play in lap seems to be very tender. This is wonderful poem and this brings emotion and tear in eyes of readers. We hope society gets the message of child. No evil act can be done. Mother should protect child inside womb and outside womb after birth. Mother's love is precious for child. May God help and save all children in womb and in Earth! A great poem with translation is presented. We thank both the original poet of the poem and translate poet for gentle and smooth presentation of this perfect thought provoking poem...10

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