तुम सदा खुश रहो.. Tum Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

तुम सदा खुश रहो.. Tum

Rating: 5.0

तुम सदा खुश रहो
शुक्रवार, ३ जनवरी २०२०


तुम सदा खुश रहो
अपनी बात कहते रहो
में चुपचाप सुनता रहु
और अपनी सुनाता राहु। तुम सदा खुश रहो

ज़माना बदल गया है
पर तुमको नहीं बदलपाया है
अपने कदमपर चलते रहना
सब की बातें सुनते रहना। तुम सदा खुश रहो

दीवानापन है दोस्ती का
कहे हुए लम्हों का
बस अपनी बातपर कायम रहो
मन ही मन गुनगुनाते रहो। तुम सदा खुश रहो

तुम्हारा ये लड़कपन
बस लगता है अपनापन
तुम तो हो ही लाजवाब
देती रहती हो सबके जवाब। तुम सदा खुश रहो

मन को सदा मक्कम रखना
बीती बातों पर कायम रहना
अपना गम अपना ही तो है
अपनी खुशियां अपनी ही तो है।तुम सदा खुश रहो

हसमुख मेहता

तुम सदा खुश रहो.. Tum
Friday, January 3, 2020
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 03 January 2020

मन को सदा मक्कम रखना बीती बातों पर कायम रहना अपना गम अपना ही तो है अपनी खुशियां अपनी ही तो है। तुम सदा खुश रहो हसमुख मेहता

0 0 Reply
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
Close
Error Success