वतन के नाम...Vatan Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

वतन के नाम...Vatan

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वतन के नाम
शनिवार, २३ मार्च २०१९

हमारी रही यही कर्मभूमि
रहती सदा कार्यसूची
उसकी प्रतिभा है बहुमुखी
सदैव रखती हमें सुखी।

हम सदा रहे उसके ऋणी
गेट गुणगान देश के वासी
वतन की कामना दिल में रखते
खुश रहते और सबकी सुनते।

सबसे प्यार और उम्दा व्यवहार
यही तो है हमारे पर उपकार
हम उसीके सहारे ज़िंदा रहते
सदा रहता नाज और हम बारबार कहते।

वतन के खातिर सब मर मिटते
अपनी जान भी न्योछावर कर देते
वतन की शान अपनी शान समझते
मन में बुरी भावना कभी ना रखतें।

वतन के नाम हजारो सलाम
उसके बल पर है हमारा दोर दमाम
देशप्रेम की दाज उगलती कलम
लेखनी भी दिखाती अपना दम।

हसमुख मेहता

वतन के नाम...Vatan
Friday, March 22, 2019
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 23 March 2019

eden s trinidad 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m

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Jai Hind 22 March 2019

Jai Hind..................!

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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