विशुद्ध और पावन
Saturday, January 20,2018
7: 45 AM
विशुद्ध और पावन
राधा। मोरे चित ना हरो
में तो हूँ एक ग्वालो
मेरा जीवन एक गोपालक जैसा
सब को लगे सहसा।
मेरे दिल में तुम ही बसे
रोम रोम बस एक ही नाम पुकारे
जीवन मेरा धन्य
ना चाहु किसी अन्य।
मीरा भी तो मेरी भक्त
में कैसे रहूं रिक्त
एक मेरे भजन की दीवानी
एक मेरे रूप की दीवानी।
तन, रोम बस मुझे ही तरसे
मानो भवभव से ही प्यासे
एक ही नाम की माला जपे
फूलम कुसुम आदि अरपे।
एक है जोगन
दूसरी वियोगन
दोनों है विशुद्ध और पावन
कहाँ मिले ऐसी भावना कोई तपोवन।
एक ही तड़प
एक ही संकल्प
आयु है अल्प
माला से एक नाम जप।
Hasmukh Mehta welcome courtney evans 1 Manage Like · Reply · 10h
welcome shanin sulana 1 Manage Like · Reply · 10h · Edited
welcome Thilagesh Thilageshwaran 3 mutual friends 1 Manage Like Like Love Wow · Reply · 2m
This poem has not been translated into any other language yet.
I would like to translate this poem
welcome Mehta Minal 11 mutual friends 1 Manage Like · Reply · 1m