नाखुदा मेरीनाव का
बुधवार, १२ फरवरी २०२०
क्या किया है कमाल?
तूने मन में मचाया धमाल
नजर मेरी जहाँ जहाँ पड़े
मेरे नयन तुजसे ही लडे।
अन्धकार में भी तेरा चेहरा
मंद मंद मुस्कुरा रहा
उजाले से में शर्मा गई
तेरा बाहो में समा गई।
याद तेरी आती रही
मेंभी मन ही मन खुश होती रही
ख़याले से ऊपर उठती रही
मेरे सपनो को साकार करती रही।
मेरी रही आस्था प्रभु के दर्शन में
पर तू सदा रहा मेरे मन के कोने में
मेरे सपनों को आकार देता रहा
मेने संजोये भविष्य को बल देता रहा।
माना मैंने उपरवाले का कहा
पर मन तो तेरे लिए तरसता रहा
वो मेरा भाग्य चलाता रहा
तू मेरी नावक का नाखुदा बना।.
हसमुख मेहता
Hasmukh Mehta u r reconized poetess dear 1 Edit or delete this Like · Reply · 30m · Reply · 1m
Hasmukh Mehta Hasmukh Mehta welcome S.R/ chandrslekha 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m
माना मैंने उपरवाले का कहा पर मन तो तेरे लिए तरसता रहा वो मेरा भाग्य चलाता रहा तू मेरी नावक का नाखुदा बना।. हसमुख मेहता
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S.r. Chandrslekha Thanks dear Hasmukh Mehta sir, What a wonderful write! Keep encouraging me to pen. 1 Hide or report this Like · Reply · 1h