Ritesh Mishra

Rookie - 25 Points [Ritesh Mishra] (05/02/1983 / Sitamarhi (Bihar))

Best Poem of Ritesh Mishra

पतझर प्यार् के मौसम का

गुल खिला बहुत मोहब्बत के मगर, प्यार् की गहरायी न माप सका

जिन्दगी गा गा कर थक गया प्यार् के नगमे बहुत, पर प्यार् की कलायी न छू सका

न जाने कितने जिंदगी तेरी प्यार् मे गुजर गए ओ बेखबर, अब तो अश्क भर ले प्यार् के अपने नयन मे




मैने था कदम बढाया गहरी प्यार् की खायी मे, कोई तो होगा वहा जो थामेगा मेरा कदम

मतलबी जहाँ ने मुझे अपने हाल पे डुबोने दिया, क्या कहूँ कम्बक्थ! प्यार् ने उस बक्त भी उसे याद किया




मुझे आज बहारों मे पतझर की याद आयी, अपनी नग्नता की कहानी जो कभी पतझर ने सुनायी

बहारों ने उतारा लिवास तो पतझर बना, जिन्दगी ने उतारा...

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