vivek pathak Poems

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1.
उपनाम

कुछ लोग मुझे बुरा कहते हैं
कुछ लोग सरफिरा कहते हैं
कुछ लोग कहते हैं अनाड़ी
और कुछ कहते हैं छिपा ख़िलाड़ी
...

2.
दास्ताँ

इस फिरका परस्ती में एक कवि ढूंढ रहा हूँ
जो जला न सके ऐसा रवि ढूंढ रहा हूँ
यूं तो गोते लगाये हैं ख़्वाबों ने कुछ ऐसे
खुद के आँगन में अपनी छवि ढूंढ रहा हूँ
...

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