ये कैसा है एहसास? Poem by C. P. Sharma

ये कैसा है एहसास?

न दिल जानता है,
न मैं जानता हूँ,
मैं इस शून्यता को
न पहचानता हूँ!

न कोई दर्द है
न कोई ख़ुशी है
न जाने ये कैसी
मेरी बेबसी है!

न जाने मैं कहाँ पे
खो गया हूँ
या खुशी -ग़म से
परे हो गया हूँ!

लगता है प्रियतमा से
मिलन का शरूर छा गया है,
अब पंछी के उड़ने का
वक्त आ गया है! ! !

ये कैसा है एहसास?
Thursday, June 16, 2016
Topic(s) of this poem: emptiness,feelings
COMMENTS OF THE POEM
Terry Craddock 16 June 2016

sadly words I cannot read, I cannot comment upon, life sometimes is a translation required

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C. P. Sharma

C. P. Sharma

Bissau, Rajasthan
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