तुम Poem by abhilasha bhatt

तुम

Rating: 5.0

यादों में तुम
सपनों में तुम
ख़्वाबों में तुम
ख़यालों में तुम
हक़ीकत में तुम
फि़ज़ाओं की सरगोशियों में तुम
दिल की हम-आगो़शी में तुम
गुलाबी सहर में तुम
छुइमुई शामों में तुम
गुनगुनी धूप से दिनों में तुम
नर्म रातों में तुम
आग़ाज़े-फ़स्ले-गुल में तुम
गहराईयों में तुम
रानाईयों में तुम
शोर में तुम
ख़ामोशी में तुम
तन्हाईयों में तुम
वीरानियों में तुम
सालों में तुम
अरसों में तुम
बरसों में तुम
दऱिया भी तुम
समन्दर भी तुम
कश़्ती भी तुम
साहिल भी तुम
गुलजा़र भी तुम
बेजा़र भी तुम
रास्ता भी तुम
मन्ज़िल भी तुम
आज़ार भी तुम
दर्माँ भी तुम
दर्द भी तुम
मरहम भी तुम
मुश्किल भी तुम
आसान भी तुम
नमीं भी तुम
कमीं भी तुम
नज़्म भी तुम
बज़्म भी तुम
आसूदगी भी तुम
तकल्लुफ़ भी तुम
जिधर देखूँ
जो भी महसूस करूँ
हर जगह हो बसते
तुम ही तुम

Sunday, December 25, 2016
Topic(s) of this poem: life,love
COMMENTS OF THE POEM
M Asim Nehal 26 December 2016

Tum hi tum aur hum tum mein goom...Wah wah kya baat hai AB...Loved it.10++++

1 0 Reply
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