एक सपना था, अच्छा है.... Poem by M. Asim Nehal

एक सपना था, अच्छा है....

Rating: 5.0

बेकरार दिल बेचैन बहुत है
बादल घने हैं, तूफ़ान उठने को है

पंछी भी अपने घौसलों में बैठे हैं
लगता है जैसे आसमान टूटने को है

बड़ा सन्नाटा है, ख़ामोशी है इस जगह
इन घाटियों में कोई ज्वालामुखी फूटने को है

झट से आंख खुली और पट से उठ बैठा
डर रहा था मैं जिससे एक सपना था, अच्छा है

Wednesday, September 23, 2020
Topic(s) of this poem: dreams
COMMENTS OF THE POEM
T Rajan Evol 28 September 2020

Wah wah ek sanjida sapna. Jisne sach me dara diya.

0 0 Reply
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Close
Error Success