बेकरार दिल बेचैन बहुत है
बादल घने हैं, तूफ़ान उठने को है
पंछी भी अपने घौसलों में बैठे हैं
लगता है जैसे आसमान टूटने को है
बड़ा सन्नाटा है, ख़ामोशी है इस जगह
इन घाटियों में कोई ज्वालामुखी फूटने को है
झट से आंख खुली और पट से उठ बैठा
डर रहा था मैं जिससे एक सपना था, अच्छा है
This poem has not been translated into any other language yet.
I would like to translate this poem
Wah wah ek sanjida sapna. Jisne sach me dara diya.