Dr. Navin Kumar Upadhyay


श्याम मुख, पेख्यो है - Poem by Dr. Navin Kumar Upadhyay

हाव-भाव-कटाक्ष मुख लखि गोपीन समाज,
अँग अनँग पूण^श्याम मुख, पेख्यो है।
कोउ सखि नहिं सक सँभार आभूषण बसन,
चहुँ ओर कामदेव निज राग भँज्यो है।।
श्री वृषभानुनँदिनी राधाजू की विरह दशा,
श्री श्यामसुन्दर जू निज नयनन लख्यो है।
नयन मूँदि श्री श्यामसुन्दर हिय ध्यान करत,
'नवीन'श्रीकृष्णचन्द्र नयन, सव^दा मँगल कर्यो है।।

Topic(s) of this poem: love


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Poem Submitted: Tuesday, March 21, 2017



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