जब प्यार की नदिया में
मे बाढ़ आएगी,
ये मिट्टी की मूरत
जब बह जायेगी
मिट्टी, फिर से मिट्टी में
मिल जायेगी
विराट दर्शन होगा
आत्म मिलन होगा
सभी भ्रम भ्रान्ति का
अंत होगा
अनन्त शांति की
अनुभूति होगी
द्वैत से होते हुए
ये जीवन यात्रा
अद्वैत की ओर
अग्रसर होगी
अपार ज्ञान का
पार न पाएं
ये भूल भुलैया मे
हमें घुमाए
ज्ञान के अहंकार
से मुक्ति होगी
भक्ति रूपी
समर्पण की श्रृष्टी होगी
भक्ति रुपी प्रेम
नय्या में जब बैठ जाएंगे
प्रेमी खेवैय्या ही
भवसागर से पार लगाएगे।
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Beautifully presented eternal and lovable poem composed and shared. Devotion is love and love is devotion...10