सर्दी का मौसम Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

सर्दी का मौसम

Rating: 5.0

सर्दी का मौसम
Friday, October 9,2020
0840 AM

सर्दी का मौसम हो
ठण्ड का एहसास होता हो
रगो में मानो खून जम रहा हो
और ठण्ड पुरबहार हो,

इसका नजारा कुछ और होता है।
बदन में मानो चुस्ती आ जाती है
फुलाएं में भी बहार
ख़ुशी का इजहार।

ठंडी लहार चल रही हो
सूरज देवता बांहे फैला रहे हो
थोड़ी सी ऊर्जा प्रदान करते हो
बस मौसम का फिर क्या कहना?

अच्छे ताजे फल
सब्जियां के ताजे रस
बादाम और अखरोट का हलवा
बस हो जाता है जलवा ही जलवा।

खूब खाओ और वर्जिस करो
पुरे खाने को हजम करो
चेहरेपर रौनक आ जाएगी
गालपर लालिमा छा जाएगी।

ठण्ड का अपना मिजाज है
इसे मजा लेने का इलाज भी है
मौज करो और सैर करने जाओ
बर्फ पर सरककर लुफ्त उठाओ।

मौसम है मिख़ार तो लाएगी
तुम्हारे बदन में शक्ति का संचार करेगी
तारो-ताजगी का एहसास दिलाएगी
कुछ नया करनेके लिए उकसाएगी।

डॉ. जाडीआ हसमुख

सर्दी का मौसम
Thursday, October 8, 2020
Topic(s) of this poem: october,poem
COMMENTS OF THE POEM
Varsha M 09 October 2020

Beautifully written winter expression and happiness it brings to us all as we there are slots of fresh fruits, green vege and others.. Indeed winter is awesome.

0 0 Reply
Mehta Hasmukh Amathalal 08 October 2020

तारो-ताजगी का एहसास दिलाएगी कुछ नया करनेके लिए उकसाएगी। डॉ. जाडीआ हसमुख

0 0 Reply
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
Close
Error Success