नजर सामने Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

नजर सामने

नजर सामने
शुक्रवार, ९ अप्रैल २०२१

डगर बढ़ाते जाइये
सफर काटते जाइये
मुकाम हांसिल करते जाइये
कभी ना पीछे मुड़कर देखिये

जीते तो सब है
पर क्या हांसिल करते है?
बस अपनी पीड़ा व्यक्त करते रहते है
सब के सामने अपना दुखड़ा रोते रहते है

नजर सामने रखो
इंतजार का मजा चखो
धीरज हमेशा रखो
अचरज ही अचरज देखोगे।

यदि जिंदगी इम्तेहान लेती है!
और कठिन परिस्थिति पैदा करती है
तो अवश्य मुकाबला करें
अपने को विचलित ना करे।

यदि जिंदगी कठिन भी है
तो यकिन का भी होना आवश्यक है
सामना करने की हिम्मत रखो
धैर्य से आगे बढ़ो।

जिंदगी बहुमूल्य है
समय भी अमुल्य है
यदि आपने समय के अनुरूप काम किया
तो मानलो आपने सफर पार कर लिया

डॉ हसमुख मेहता

नजर सामने
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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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