मुझे मिल जाए Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

मुझे मिल जाए

मुझे मिल जाए
बुधवार, १९ मई २०२१

यदि तू मुझे मिल जाए
संगी बने और साथ हो जाए
सपने मेर सच हो जाए
दुनिया मेरी रंगीन हो जाए। यदि तू मुझे मिल जाए

तू लगती है सुन्दर और कमसिन
चेहरा तेरा मासूम और लगती हो हसीन
बस तेरा ही आता है ख़याल
ना हो जाए अनबन और वबाल। यदि तू मुझे मिल जाए

तेरी बातो में है बड़ा दम
मिलके रहेंगे दोनों हमदम
तू लगा देना दिलपर मरहम
ना आए जिंदगी में कोई गम। यदि तू मुझे मिल जाए

बस रही मन में एक ही आस
लगी रहेगी जब तक साँस मे सांस
तेरा आना बन गया, मेरे लिए ख़ास
कभी तोड़ना ना दिल और करना निराश। यदि तू मुझे मिल जाए

तू है अपनी जगह
यही बनी सही वजह
साथ मे घुमना, साथ में फिरना
दिल को चुराकर अनजाना बनना। यदि तू मुझे मिल जाए

जब हां ही कहा है तो करके दिखाना
सपने मेरे संजो के रखना
बात को आगे यूँही बढ़ाना
मिलकर दोनों सपने सजाना। यदि तू मुझे मिल जाए

डॉ हसमुख मेहता
डॉ लिटरेचर, फेलो

मुझे मिल जाए
POET'S NOTES ABOUT THE POEM
जब हां ही कहा है तो करके दिखाना सपने मेरे संजो के रखना बात को आगे यूँही बढ़ाना मिलकर दोनों सपने सजाना। यदि तू मुझे मिल जाए डॉ हसमुख मेहता डॉ लिटरेचर, फेलो
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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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