मौत का पैगाम Poem by Dr. Yogesh Sharma

मौत का पैगाम

Rating: 5.0

अबके बसंत में शरारत मेरे साथ हुई,
पतझड़ मेरे बाग में और आतंकी के बरसात हुई।
दुनिया हँसने लगी मेरे दर्दे दिल पर,
मै कराह रहा था और वहां आतिशबाजी हुई।
सदियों से पाठ प्रेम का पढ्ते पढाते रहे,
पर बदले मै हम पर खून की बारिश हुई।
हर दिन हर रात पिट कर हम सोये,
पर उनके दिल मे रहम की आहट ना हुई।
मैंने पूछा कि कहीं प्यार की बयार चली?
तभी कातिलों ने कलेजे पर खंजर घुमाई।
ये पैगामे मौहब्बत सब फरेब है मेरे भाई,
उनके लिये मौत का पैगाम ही इबादत हुई।

मौत का पैगाम
POET'S NOTES ABOUT THE POEM
The poem is about fanaticism.
COMMENTS OF THE POEM
Dr Dillip K Swain 20 October 2021

A magnificent poem! I have already voted and taken it

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