हालांकि वह आजाद है लेकिन कैदी की तरह रहता है Poem by M. Asim Nehal

हालांकि वह आजाद है लेकिन कैदी की तरह रहता है

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हालांकि वह आजाद है लेकिन कैदी की तरह रहता है
हालांकि वह एक राजा है लेकिन एक फकीर की तरह रहता है

उनके विश्वास के स्तर को देखें ज़माने से निराला है
वह रेत के घर में भी अमीरों तरह रहता है

फिर न लौटूंगा इस वादे के साथ चला जाता है
वह जो हवा में हवाओं में सुगंध की तरह रहता है

शत्रु मेरे जीवन का है और दिल में रहता है
गिनता है मेरी उम्र को सदा और साँसे बन के रहता है

जिसने इस जीवन को जिया है नज़दीक से सदा
आसमान में उड़ते बादलों की तरह रहता है

This is a translation of the poem Prisoner by M. Asim Nehal
Friday, August 19, 2022
Topic(s) of this poem: ghazal
COMMENTS OF THE POEM
Rajan Trajan Renganathan 19 August 2022

Bahut Badiya Ghazal.

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M. Asim Nehal

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Nagpur
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