चाँदनी -सी Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

चाँदनी -सी

Rating: 5.0

चाँदनी -सी
सोमवार, १९ अगस्त २०१९

किसी सोच में डूबा रहा
जिंदगी लगे मुझे तनहा
नहीं कोई दिखता। मुझे हमसफ़र
कटतानहीं आसानी से सफर।

वो मिले थे मुझे किसी मोड़पर
लगने लगे मेरे राहबर
चेहरे पे ख़ुशी छा गई
मुर्दनी को हमेशा बीदा कर गई।

लगे पल मुझे सुनहरी याद
क्या पता था की वो मुझे कर देंगे बर्बाद!
छोड़ के ऐसे चले गए
कितनी बातोंको उलझा गए।

जिंदगी इतनी यदि आसान होती
आदमी को कभी कमी नहीं लगती
राहपर चलते चलते। वक्त गुजार देते
सब को अपनी अपनी। वफ़ा दिखा देते।

आइना में जब मैंने देख लिया
खूबसूरती का अंदाज़ लगा दिया
जैसे बाहर थी, वैसे अंदर भी थी
चांदनी को संवारे चाँद-सी थी।

हसमुख मेहता

COMMENTS OF THE POEM
Kumarmani Mahakul 18 August 2019

Life is memorable and beautiful like moon. A brilliant poem is shared.

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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