नव वर्ष ले आया नया विहान है Poem by Brajendra Nath Mishra

नव वर्ष ले आया नया विहान है

नव वर्ष ले आया नया विहान है
नयी चेतना है नवीन है चिंतन,
नयी करवटें ले रहा, नवजीवन
नवीन संकल्प लिए प्रण महान है
नव वर्ष ले आया नया विहान है

व्यथाओं को विराम दें,
वेदना का करें विस्मरण,
चेतना के उच्च शिखर पर,
करुणा का हो प्रष्फुटण

प्रणय अनुमोदन लिए भरा
प्राण है
नव वर्ष ले…

गीति लहरिओं पर नया राग है
नवीन पुष्पों पर नया पराग है
प्रकृति पट खोल रही,
जीवन रस घोल रही
दिग दिगंत में खुला नया वितान है
नव वर्ष ले…।

नया जोश है नयी उमंग है
तन मन में बज रहा जलतरंग है
नवीन कल्पनाये हैं
नवीन रचनाये हैं
नवीन संवेदनाएं संग नयी उड़ान है
नव वर्ष ले…


नए क्षेत्र में नयी शोध है
नए विचारों कि नयी पौध है
मन में नयी खोज है
निरंतर नया ओज है
नए क्षेत्र के लिए नया ज्ञान है
नव वर्ष ले…।

हिंशा प्रति हिंशा का विनाश हो'
शांति प्रस्तावों पर नया प्रयास हो
अनाचार सिमट रहा
व्यभिचार मिट रहा
अहिंषा से प्रतिबद्ध सारा जहाँ है
नव वर्ष ले…।



The New Year brought a new dawn,
The new contemplation with new consciousness,
The new phase of new life taking shape
Great pledges with new resolutions
The New Year brought a new dawn,

- ब्रजेन्द्र नाथ मिश्रा

POET'S NOTES ABOUT THE POEM
This poem is written on the eve of the new year giving an optimistic a message for the new year. The poem has been written in Hindi. It can be sung in verse also. Hope to have your comments. The first stanza has been translated into English also.
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