Brajendra Nath Mishra

Brajendra Nath Mishra Biography

About myself:
After 39 years of sweating the energy in Tata Steel’s production units, how can one think of writing literature at the age of 62 years? But I have ventured into that folly by chance or intentionally I do not know. One thing is quite clear in my mind that my irresistible desire to explore into the realms of writing literature has pe ...

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The Best Poem Of Brajendra Nath Mishra

महकाएँगे जग को देकर नव सन्देश.

महकाएँगे जग को देकर नव सन्देश.

हम बच्चे हैं फूल उपवन मेरा देश,
हम महकाएँगे जग को देकर नव सन्देश.

भेदभाव सब मिट जायेंगें,
आपस में हिलमिल गायेंगे.
एक हमारा नारा है,
सारा विश्व हमारा है.

एक सांस है एक हृदय है, भिन्न - भिन्न हैं वेश,
हम महकाएंगें जग को देकर नव सन्देश.

झगड़े आपस में निपटाएं,
प्रेम - लता के बीज उगाएं,
दुश्मन को भी दोस्त बनाएँ,
सारे जग को बंधू बताएं.

होगा हरदम स्नेह से मेरे ममता का उन्मेष,
हम महकाएंगें जग को देकर नव सन्देश.

उदास कहीं न हो बचपन,
किसी गली में न हो क्रंदन,
बहनें कहीं न अपमानित हों,
आशाओं को न लगे ग्रहण.

भारत में फिर स्थापित हो माओं का सम्मान विशेष.
हम महकाएंगें जग को देकर नव सन्देश.

बुद्धा ने जग को मार्ग दिखाया,
गांधी ने विश्वास जगाया,
हिंशा का छोडो अवलम्बन,
सत्य प्रेम के ढृढ कर बंधन.

अब न धरा पर रह पायेगा दुःख, द्वेष और क्लेश.
हम महकाएंगें जग को देकर नव सन्देश.

आज मचा जो हाहाकार,
नहीं दुःख का पारावार,
जग बंधू का नाता जोड़ो,
शांति - धार के रास्ते मोड़ो.

प्रेम और बँधुत्व ही हो अब जीवन का उद्देश्य.
हम महकाएंगें जग को देकर नव सन्देश.

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