ये दिल Poem by Praveen Yadav

ये दिल

क्यू तेरे बगैर बेवजह मुझसे रूठता है ये दिल
क्यू सिर्फ तेरी ही शिकायते करता है ये दिल
क्यू करती है तेरी यादें इसे परेशान इतना

क्यू रहता है ये हर पल तेरे ही इंतज़ार मे
क्यू खोया है ये हर लम्हा तेरे ही प्यार मे
क्यू चाहा है इसने तुझे ही इस जहां मे
क्यू मांगा है इसने तुझे ही अपने अरमान मे

क्यू डरता है ये पागल तुझे खोने से
क्यू डरता है ये तुझसे इक पल भी जुदा होने से
क्यू करता है दुआ सदा तेरे ही पास आने को
क्यू नही समझती ये दुनिया इस बेगाने को

तेरे ही साथ के लिए बना है ये तो
तेरे ही प्यार मे फना है ये तो
जब दिल करे प्यार से पुकार लेना
तेरे ही साथ हरपल रहता है ये तो

क्यू तेरे ही ख्वाब सँजोता है ये तो
क्यू तेरी ही बातें करता है ये तो
क्यू इसका मुकाम सिर्फ तू ही है

क्यू इसके धड़कने की वजह सिर्फ तू ही है
क्यू इसने तेरे ही संग अपनी दास्तान बनाई है
क्यू इस दिल को सिर्फ तू ही रास आई है

तभी किसी ने कहा है....दिल तो पागल है........।

Sunday, May 18, 2014
Topic(s) of this poem: heart
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