Praveen Yadav Poems

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1.
आज और मैं

आज कुछ ठहर सा गया हूँ मैं
अपने ही अंदर बिखर सा गया हूँ मैं
बेजुबान लफ्ज और खामोश हैं आंखे
आज खुद से ही डर सा गया हूँ मैं
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2.
ये दिल

क्यू तेरे बगैर बेवजह मुझसे रूठता है ये दिल
क्यू सिर्फ तेरी ही शिकायते करता है ये दिल
क्यू करती है तेरी यादें इसे परेशान इतना
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3.
ज़िंदा हूँ....

तेरी यादों के साये मे ज़िंदा हूँ बस तेरे लिए
तेरी बाहों की पनाहों मे ज़िंदा हूँ बस तेरे लिए

ख़यालो मे बुने जो तेरे ख्वाब हैं
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