आज कुछ ठहर सा गया हूँ मैं
अपने ही अंदर बिखर सा गया हूँ मैं
बेजुबान लफ्ज और खामोश हैं आंखे
आज खुद से ही डर सा गया हूँ मैं
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क्यू तेरे बगैर बेवजह मुझसे रूठता है ये दिल
क्यू सिर्फ तेरी ही शिकायते करता है ये दिल
क्यू करती है तेरी यादें इसे परेशान इतना
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तेरी यादों के साये मे ज़िंदा हूँ बस तेरे लिए
तेरी बाहों की पनाहों मे ज़िंदा हूँ बस तेरे लिए
ख़यालो मे बुने जो तेरे ख्वाब हैं
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