आज कुछ ठहर सा गया हूँ मैं
अपने ही अंदर बिखर सा गया हूँ मैं
बेजुबान लफ्ज और खामोश हैं आंखे
आज खुद से ही डर सा गया हूँ मैं
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क्यू तेरे बगैर बेवजह मुझसे रूठता है ये दिल
क्यू सिर्फ तेरी ही शिकायते करता है ये दिल
क्यू करती है तेरी यादें इसे परेशान इतना
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तेरी यादों के साये मे ज़िंदा हूँ बस तेरे लिए
तेरी बाहों की पनाहों मे ज़िंदा हूँ बस तेरे लिए
ख़यालो मे बुने जो तेरे ख्वाब हैं
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I don't know what's life...i don't know how it goes on. but still i believe one thing that we makes our life to move as it moves, we've the power to live our life as we wants but we should compromise at some corner stones of our life. so keep going...)
आज और मैं
आज कुछ ठहर सा गया हूँ मैं
अपने ही अंदर बिखर सा गया हूँ मैं
बेजुबान लफ्ज और खामोश हैं आंखे
आज खुद से ही डर सा गया हूँ मैं
सपनों के बीज क्यूँ पानी को तरसे हैं
अपने ही ख्वाब क्यूँ मुझ पे बरसे हैं
दिल मैं कैद अब सिर्फ तनहाई हैं
मुझसे ही रूठी अब मेरी परछाई है
हर नजर अब मुझे आजमाती हैं
किस्मत भी अब मुझपे गुर्राती हैं
धुंधला सा हो गया हैं आज आईना भी
मेरे अक्स को भी मुझसे शर्म आती हैं
चीखती हैं अब मेरी आहें मुझ पर
खफा हैं मेरी हर चाह मुझ पर
तड़पती हैं सोच भी मेरे साथ चलने पर
तरसते हैं खयाल भी मेरे हाल पर
धड़कन मेरी अब धीमे होने लगी हैं
तेवर मेरे सब ठंडे पड़ने लगे हैं
हंसी भी मेरी अब छूट सी गयी हैं
खुशियाँ भी मुझसे दगा करने लगी हैं
पर जाने किस आस पे मैं चलता जा रहा हूँ
टुकड़े हुए ख्वाबो पे मैं पलता जा रहा हूँ
जाने किस मोड पे वो वक़्त मिल जाये
और
मेरे अनाथ से सपनों को इक पनाह मिल जाये।