सब मिल जुल कर काम करें।
मुल्क का ऊंचा नाम करें।
क्या मिलता है लड़ने से
ज़ुल्म किसी पर करने से ।
आह ! तबाही ला सकती है।
आह ! के अंदर वो शक्ति है ।
धर्म ज़ात, न पात करो
बात बने, वो बात करो
सब्र का दामन छोड़ो मत ।
दिल ये किसी का तोड़ो मत।
आओ, हाथ मिलाते हैं ।
गीत ख़ुशी के गाते हैं।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार
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