कहानी ज़िंदगी की, ज़िंदगी भर याद आएगी।
हंसेगा गुल अगर सुनकर , कली भी मुस्कुराएगी।
वहां से ही सफ़र की एक नई शुरुआत होती है,
जहां पर छोड़ कर, मतलब की दुनिया भाग जाएगी।
अगर तुम कामयाबी की बुलंदी पर पहुंचते हो ,
तो दुनिया आप को नीचा, कभी भी न दिखाएगी।
लहू दे दो, या दे दो ज़िंदगी तुम,
ये दुनिया आज़माती है, ये दुनिया आज़माएगी।।।
बचा लो डुबती नफ़रत से दुनिया को बचा लो,
ये नफ़रत , आने वाले दौर में , सबको रूलाएगी।।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार
This poem has not been translated into any other language yet.
I would like to translate this poem