मदरसे की तालीम ने है संवारा।
है रिश्ता मदरसों से गहरा हमारा ।
है दिल में हमारे ये क़ुरआन सारा।
मिला है, मिलेगा ख़ुदा का सहारा।
मेरी मेहनतों का समर बोलता है।
मुहब्बत में हर एक बशर बोलता है।
मदरसों के बच्चे बड़े मेहनती हैं।
ये ईमान वाले, सभी जन्नती हैं।
ये जब डाक्टर बन के ख़िदमत करेंगे।
मरीज़ों से अपने मुहब्बत करेंगे।
दुआ उनको देंगे, दवाई भी देंगे।
ग़रीबों को अपनी कमाई भी देंगे।
है उम्मीद दुनिया में इज़्ज़त मिलेगी।
दुआ कि कमाई से, दौलत मिलेगी।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार
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