मैं लिखने चला हूं तुम्हारी कहानी।
कहीं बीत जाए न, इसमें जवानी ।
बढ़ा कर के आवाज़, नखरा दिखाना
है आदत बहुत ही, तुम्हारी पुरानी ।
लगा कर के तोहमत, जला कर के दिल को
गिराती है अक्सर, वो आंखों से पानी।
न नींद आई एक पल, न चैन आया एक पल
सुना घर की हालत, जो उसकी ज़ुबानी।
ये दर्दे जिगर किस से जा कर बताऊं
ये दर्दे मुहब्बत तो है ख़ानदानी ।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार
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