बिगाड़ कर न नाम दो ।
ज़ुबान पे, , , लगाम दो।
जो कुछ नहीं हैं कर रहे
उन्हें तो पहले काम दो।
अलग-अलग दुकानों में
है चीज़ एक, दाम दो ।।।
जो सच के साथ हैं खड़े
उन्हें भी कुछ इनाम दो ।
वतन के हक़ में ये करो
अमन तो सुबह, शाम दो ।
तहस नहस है कर दिया
वो कौन है ग़ुलाम दो ।।।
पनप न पाए नफ़रतें
कुछ ऐसा इंतज़ाम हो।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार
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