बिगाड़ कर न नाम दो Poem by Anjum Alinagari

बिगाड़ कर न नाम दो

बिगाड़ कर न नाम दो ।
ज़ुबान पे, , , लगाम दो।

जो कुछ नहीं हैं कर रहे
उन्हें तो पहले काम दो।

अलग-अलग दुकानों में
है चीज़ एक, दाम दो ।।।

जो सच के साथ हैं खड़े
उन्हें भी कुछ इनाम दो ।

वतन के हक़ में ये करो
अमन तो सुबह, शाम दो ।

तहस नहस है कर दिया
वो कौन है ग़ुलाम दो ।।।

पनप न पाए नफ़रतें
कुछ ऐसा इंतज़ाम हो।

© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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