जब मौत पे कोई हंसता है।
और शान से ताना कसता है।
तो समझो नफ़रत हावी है।
जो सबसे बड़ी बीमारी है।
ये धर्म नहीं सिखलाता है।
न धर्म गुरु बतलाता है ।
बस अपनी सियासत की ख़ातिर।
ये चाल है चलता हर शातिर ।
जो मुल्क का दुश्मन होता है।
वो नफ़रत मुल्क में बोता है।।
जो इन के लीडर होते हैं।।।
इनको संरक्षण देते हैं।।।
ये जो चाहें, कर सकते हैं।
ये झूठ को सच लिख सकते हैं।।।
ये लड़ने लड़ाने में माहिर।
बातों से होता है ज़ाहिर।
ये गाली वाली बकते हैं।।
और दानव जैसे दिखते हैं।
न शर्म हया, न ख़ुद्दारी।
ये ज़ालिम मुल्क पे हैं भारी ।।।
जो मुल्क को करते हैं बदनाम।
मुस्लिम पे लगा कर के इल्ज़ाम।।
वो प्यार की भाषा क्या जाने।।।
क़ानून को वो कैसे माने ?
जो ख़ुद ही दंगा करवाए।
बदनाम तिरंगा करवाए।
वो देश का कैसे रक्षक हो ।
जो अमनो अमां का भक्षक हो ।।।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार
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