ज़ालिम का ज़ुल्म देखकर हैरान हो गया Poem by Anjum Alinagari

ज़ालिम का ज़ुल्म देखकर हैरान हो गया

ज़ालिम का ज़ुल्म देखकर हैरान हो गया।
हिन्दुस्तां का दिल ये परेशान ‌ हो गया।

इस देश को मारा है, इसी पत्रकार ने
ये कहना अब तो और भी आसान हो गया।

अपनों से लड़ रहे हैं, वो लोग इस तरह
जैसे के जंग लड़ने का ऐलान हो गया।।

इंसानियत का क़त्ल हुआ, जब सबके सामने
सुन सान अपना सारा, गुलिस्तान हो गया।

नफ़रत की पाठशाला में पढ़ने के बाद वो
इंसान का बच्चा था, जो हैवान हो गया।
© अंजुम अलीनगरी दरभंगा बिहार

Thursday, September 24, 2026
Topic(s) of this poem: ghazal
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ज़ुल्म की उम्र नहीं होती है
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Anjum Alinagari

Anjum Alinagari

Alinagar, Darbhanga
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