भंवर में जिसकी नाव है Poem by Anjum Alinagari

भंवर में जिसकी नाव है

भंवर में जिसकी नाव है।
वो लड़ रहा चुनाव है।

मगर है हौसला बड़ा
के साथ पुरा गांव है।

तो ऐसे लोग क्या करें
चुनाव क्या नहीं लड़ें ।

चुनाव वो लड़ें ज़रूर ।
मगर करें न वो ग़रूर ।

कि नोट हम लुटाएंगे
और वोट हम बनाएंगे।।।।

वो वक़्त अब चला गया
जो जीत कर चले गए।

जो बीच हैं, समाज के
वहीं हैं हिरो आज के

समाज से जुड़े हैं जो,
उन्हीं को वोट दीजिए।
पढ़े, लिखे, सजग हैं जो
उन्हीं को वोट कीजिए।

ये वक़्त ए एम्तेहान है,
के जीत हो समाज की ।
हर एक की ज़ुबान है,
के जीत हो समाज की ।।।

समाज से ही गांव है ।

‌चुनाव तय करेगा ये
घटेगा की, बढ़ेगा ये ।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

POET'S NOTES ABOUT THE POEM
चुनाव अब पैसे के बल पर ही लड़ कर नहीं जीता जा सकता है।
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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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