जगाओ मत, अभी हम सो रहे हैं Poem by Anjum Alinagari

जगाओ मत, अभी हम सो रहे हैं

जगाओ मत,
अभी हम सो रहे हैं।
हम अपने हक़ को
सो कर खो रहे हैं।

किसी मसले का हल
निकलेगा कैसे,
हम अपने हाल पे,
बस रो रहे हैं।

जिधर देखो,
उधर नफ़रत की बू है।
जहां देखो,
परेशां हो रहे हैं।


जिन्हें लगता है,
हम जिंदा नहीं हैं।
हमारे नब्ज़ को,
वो टो रहे हैं।


उन्हें मालूम है तेरी‌
हक़ीक़त।
तुम्हारे साथ हरपल
जो रहे हैं।

तेरी नफ़रत को
उल्फ़त से कुचल कर,
मुहब्बत का फ़सल
हम बो रहे हैं।
© अंजुम अलीनगरी दरभंगा बिहार

Saturday, August 22, 2026
Topic(s) of this poem: education,motivation,reveloution
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जगाओ मत, अभी हम सो रहे हैं।
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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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