अमन का डंका गले में डालो Poem by Anjum Alinagari

अमन का डंका गले में डालो

अमन का डंका गले में डालो ।
दिल में अपने, प्यार बसालो ।

मक़सद है आज़ादी का ये।
हक़ है हक़ , आबादी का ये।

बीन इसके न चैन मिलेगा।
गुलशन में न फूल खिलेगा।

हो न ये बर्बाद सभालो।
अमन का डंका, गले में डालो।

बद से बदतर बनी है हालत ।
भेज रही है दुनिया लानत।

सेहत और तालीम है नाक़िस।
हर सू नफ़रत की है साज़िश।

छाया है अंधेरा घर में।
तनहा सब है बड़े शहर में।

हल इसका अब जल्द निकालो।
अमन का डंका , गले में डालो।

© अंजुम अलीनगरी

Friday, July 3, 2026
Topic(s) of this poem: nazm,urdu,hindi,peace,wake up call
POET'S NOTES ABOUT THE POEM
ये नज़्म मुहब्बत को आवाज़ दे रही है । अमन शांति की अहमियत पर आधारित है
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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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