मेरी बेटी सोना है Poem by Anjum Alinagari

मेरी बेटी सोना है

मेरी बेटी सोना है।
मां की एक खेलौना है।

पापा पापा कहती है।
सबसे मिलकर रहती है।

सुनते ही आवाज़ हमारी
गेट पे आ जाती है प्यारी ।

खिल जाता है चेहरा मेरा
शुक्र ए ख़ुदा है रब ये तेरा।

देखते ही ख़ुश हो जाती है।।
किसने किया क्या बतलाती है।

भाती है हर बोली उसकी ।
दोस्त है हर हमजोली उसकी।

आंगन घर में चलती है ।
बाहर नहीं निकलती है ।

घूमने में वो माहिर है।
घूमना उसकी ख़ातिर है।

कलमा पढ़ कर सोती है।
हो तकलीफ़ तो रोती है।

शौक़ बहुत है पढ़ने का ।
हर पल आगे बढ़ने का ।

कह दे वो जो, लाना है।
हरगिज़ नहीं भुलाना है।

वरना पास न आएगी ।
आने से कतराएगी ।।।

करती वो फरमाइश है।
ख़ुश वो रहे, ये ख़्वाहिश है ।

इल्म ख़ुदा दे, आला दर्जा ।
रब से यही, गुज़ारिश है।

बेटी है अनमोल रत्न।
जिससे है आबाद चमन ।
अल्लाहवाली बेटी मेरी ।
पांच भाई की एक बहन।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

Thursday, September 24, 2026
Topic(s) of this poem: daughter
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बेटी दुआ के नाम लिखी गई कविता
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Anjum Alinagari

Anjum Alinagari

Alinagar, Darbhanga
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