नफ़रत की, सियासत की, तू तस्वीर बदल दे। Poem by Anjum Alinagari

नफ़रत की, सियासत की, तू तस्वीर बदल दे।

नफ़रत की, सियासत की, तू तस्वीर बदल दे।
करते हैं दुआ, रब तेरी तक़दीर बदल दे ।

जो ख़्वाब न पूरा हो, वही ख़्वाब बूरा है,
अल्लाह बूरे ख़्वाब की ताबीर बदल दे।

मंज़िल को जो आसान करे, काम वही है,
जो काम का नहीं हो, वो तदबीर बदल दे।

जो क़ैद में रहकर भी क़ानून को माने,
वो कैसे भला पांव की ज़ंजीर बदल दे।

ये सच है क़लमकार के ताक़त है क़लम में,
जो लफ़्ज़ों से, ज़ेहन की तासीर बदल दे।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

Thursday, September 10, 2026
Topic(s) of this poem: ghazal,hindi
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नफ़रत की, सियासत की, तू तस्वीर बदल दे।।
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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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