अब वतन में सकूं चाहिए।
ख़ुद में जोश व जूनु चाहिए।
जान अपनी हथैली में है।
क्योंकि क़ातिल को ख़ूं चाहिए।
लाश पे लाश बिछने लगी।
होश में अब तो आ जाइए।
कितनी सस्ती मेरी जान है।
सच ये दुनियां को बतलाइए।
दर्दो व ग़म में परेशान हूं,
आप जल्दी से आ जाइए ।।।।।।
©अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार
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