बहकावे में आओ मत Poem by Anjum Alinagari

बहकावे में आओ मत

बहकावे में आओ मत ।
आपस में टकराओ मत ।

ज़ालिम को ज़ालिम कहने में
हरगिज़ तुम शर्माओ मत ।

जो हक़दार के हक़ को मारे
उससे हाथ मिलाओ मत ।

दुश्मन हों या दोस्त तुम्हारे
राज़ ए दिल बतलाओ मत ।

ज़हर ज़ेहन में जो भरते हों
उनको गले लगाओ मत ।

वोट नोट के चक्कर में
जनता को उलझाओ मत ।

उनकी कुर्सी रहे या जाए
अपना ख़ून बहाओ मत।

ख़्वाब हक़ीक़त में बदलेगा
बस भाई , घबराओ मत।
© अंजुम अलीनगरी दरभंगा बिहार

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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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