बहकावे में आओ मत ।
आपस में टकराओ मत ।
ज़ालिम को ज़ालिम कहने में
हरगिज़ तुम शर्माओ मत ।
जो हक़दार के हक़ को मारे
उससे हाथ मिलाओ मत ।
दुश्मन हों या दोस्त तुम्हारे
राज़ ए दिल बतलाओ मत ।
ज़हर ज़ेहन में जो भरते हों
उनको गले लगाओ मत ।
वोट नोट के चक्कर में
जनता को उलझाओ मत ।
उनकी कुर्सी रहे या जाए
अपना ख़ून बहाओ मत।
ख़्वाब हक़ीक़त में बदलेगा
बस भाई , घबराओ मत।
© अंजुम अलीनगरी दरभंगा बिहार
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