विज्ञानिकों को देश के मेरा सलाम है Poem by Anjum Alinagari

विज्ञानिकों को देश के मेरा सलाम है

विज्ञानिकों को देश के मेरा सलाम है।
इसरो का अंतरिक्ष में आला मुक़ाम है।

जैसे ही पहुंचा चांद पे, ये चंद्रयान तीन।
चेहरा ख़ुशी से खिल उठा, मंज़र लगा हसीन।

ताली बजा बजा कर, खुशियां मनाने वाले
पल पल की ख़बर देकर, सबको हंसाने वाले

इसरो में बैठ कर के, इतिहास लिख रहे हैं।
भारत का एक नज़रिया, एहसास लिख रहे हैं।

दुनिया में हम कहां हैं, सबको बता रहे हैं।
हर एक ज़िम्मेदारी, मिल कर निभा रहे हैं।

न छल है, न कपट है, बस काम कर रहे हैं।
तालीमों तरबियत को, ये आम कर रहे हैं।
ये देश का हमारे बस, नाम कर रहे हैं।
नेता तो इस वतन को, बदनाम कर रहे हैं।


इनकी वजह से भारत, मेरा महान है।
दुनिया में सबसे बेहतर हिंदुस्तान है।

© अंजुम अलीनगरी दरभंगा बिहार

Sunday, August 23, 2026
Topic(s) of this poem: moon
POET'S NOTES ABOUT THE POEM
चंद्रयान तीन
COMMENTS OF THE POEM
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Anjum Alinagari

Anjum Alinagari

Alinagar, Darbhanga
Close
Error Success