मेरी गुज़ारिश है कि अनशन तोड़ दें ।
उनको, उनके हाल पे अपने छोड़ दें।
आएगा वो दिन जब वो पछताएंगे।
युवा देश के, उनको सबक सिखाएंगे।।।
भूखे रहकर उनसे लड़ना ठीक नहीं।
जिस्म व जां पे ज़ुल्म ये करना ठीक नहीं।
आप भविष्य के, भरत के रखवाले हैं।।
'सोनम वांगचुक' आप तो हिम्मत वाले हैं।
बढ़े मुहब्बत, इस पे थोड़ा ज़ोर दें।।।।
मेरी गुज़ारिश है कि अनशन तोड़ दें।।।।
सच्चाई है आप की हर एक बातों में।
बहते नहीं हैं आप कभी जज़्बातों में।
फ़िक्र बहुत है आप को देश के बच्चों का ।
साथ मिला है, आप को अबतक अच्छों का ।
आप ने मुश्किल क़दम क़दम पे झेला है।
कौन है कहता, वांगचुक आज अकेला है।
लड़ते रहे हैं, लड़ते रहेंगे साथ में
जीना मरना, है बस रब के हाथ में।
टूटे दिल को, मिल जुलकर फिर जोड़ दें।
मेरी गुज़ारिश है कि अनशन तोड़ दें।।।।।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार
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