अपनी मंझिल
मंगलवार, ७ अप्रैल २०२०
ये खुले रस्ते
नही है सब के वास्ते
अभिवादन करते रहो चलते चलते
और कहो झुककर नमस्ते।
मंझिल नहीं नसीब सब को
मोड़ना है अपने नसीब को
कुछ भी हो जाए डगरपर
चलते रहना है अपने पथपर।
आप की परीक्षा है
और प्रतीक्षा भी है
जीतना सामर्थ है आप मे
सरलता भी उतनी उसको वश करने में।
यदि आसान डगर इतनी ही होती
तो सबकी नैया पार हो जाती
लोग भीना सोचते कठिनाई के बारे में
मिल जाती सब चीजे सस्ते में।
जीवन का अपना अंदाज़ है
हरकोई यहां तीरंदाज़ है
निशाना अचूक लगाता है
पर बाजी नहीं मार पाता है
ना मारो तीर अँधेरे में
ना रहो कभी शक के घेरे में
आसानी हो भी सकती है
लेकिन परेशानी पीछा नहीं छोड़ती है।
मंझिल दूर हो या पास
ढूंढते रहो लगा के आस
किनारे पे कश्ती तो लग ही जाएगी
अपना परछम जरूर लहराएगी।
मंझिल नहीं तो जीवन नहीं
पान ही अपना मकसद सही
बाकि जीवन तो हर कोई जी लेते है
काट लेते है दिन और रो भी लेते है।
हसमुख मेहता
Jonah Demesa 1 mutual friend 1 Edit or delete this Like · Reply · 1m
मंझिल नहीं तो जीवन नहीं पान ही अपना मकसद सही A brilliant and excellent poem is nicely shared.
मंझिल नहीं तो जीवन नहीं पान ही अपना मकसद सही बाकि जीवन तो हर कोई जी लेते है काट लेते है दिन और रो भी लेते है। हसमुख मेहता
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