Hasmukhlal Amathalallal

Gold Star - 521,205 Points (17/05/1947 / Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India)

बल्ले बल्ले... balle balle - Poem by Hasmukhlal Amathalallal

बल्ले बल्ले

समजने और समजाने में अंतर है
दोनों चीजे वैसे तो समान्तर है
एक को ख्याल रखना है
दूसरे को सवाल नहीं करना है।

प्यार को हरकत नहीं कहते
यह वाकया नहीं हकीकत है
दिल को कहो सब्र करे
आत्म -ग्लानि से दिल ना भरे।

दिल की बात दिल तक सिमित रखो
बस अमिट नजरों से देखो
हम जरूर आएंगे
और दुल्हनिया बनाकर ले जायेंगे

दिल की लगी को भरमाना नहीं कहते
हर बात में शर्माना को लाज नहीं कहते
बस आँखे निचे रख के बात करने में हर्ज नहीं
वहम हो दिल में तो इसका कोई मर्ज नहीं

हमारा दिल नदी के बहाव की तरह साफ़ है
आपका सब कहा सुना माफ़ है
दिल्लगी को अब छोडो
संताप को मन से निकालो और दिल को जोड़ो

समजा करो इशारो में
खुश रहो बहारो में
फूल को खिलने दो खुल्ले में
मुस्कराहट से कहो 'बल्ले बल्ले '


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Poem Submitted: Tuesday, March 31, 2015



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