बात मिसाल की.. Bat Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

बात मिसाल की.. Bat

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बात मिसाल की
गुरूवार, १३ अगस्त २०२०

कल्पना की कोई सीमा नहीं
इज्जत जैसी कोई गरिमा नही
गंगा जैसे कोई सारिता नहीं
और इंसान जैसा कोई फरिश्ता नहीं।

दिमाग घूम जाता है
यदि कोई उल्टा-सीधा कर देता है
अपनों से अपना उल्लू सीधा कर देता है
और इंसानियत के नाम पर बट्टा लगा देता है।

सूना भी है ओर पढा भी
बहुत से लोगोंके साथ लड़ा भी
बात मिसाल की नहीं है
पर हरकत जूठे इंसान की है।

कहते है "कपड़ों के पीछे हरकोई नंगा है"
पवित्र बन जाओ डुबकी लगाकर क्योकि नदी गंगा है
यदि ऐसा हो जाता है तो हमें क्यों पश्याताप करना है?
बड़े बड़े पूजा स्थलों में जाकर क्यों प्रार्थनाए करना है?

येवहम ही नहीं
बदमाशी की पराकाष्टा है
नीच किसम की चेष्टा है
देखते हुए भी हरकत दुष्टा है।

मलिन भावनाए, नीच हरकते
हमारे दिल कभी नहीं पसीजते
जब तक कुदरत की मार नहीं लगती
और उसकी गाज अपनों पे नहीं गिरती।

इंसान का है ये बचपना
बदहवस और मलिन मनोकामना
हरदम धोखा देने की कोशिश और कामना
जल्दी से धनवान होने की लालसा और नाम पाने की तमन्ना।

में नहीं जानता कहाँ जाकर लालसा रुकेगी!
मन की लालचकहाँ जाकर पटेकगी
मुझे नहीं मिली तो तेरे को भी नहीं लेने दूंगा
मर जाऊंगा और मार भीदूंगा

डॉजाडीआ हसमुख

बात मिसाल की.. Bat
Thursday, August 13, 2020
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 13 August 2020

Poem: 58965746 - बात मिसाल की.. Bat Member: Sharad Bhatia Comment: गुरु जी सादर प्रणाम, , फिर से बहुत प्यारी कविता सोच अगर मैं बदलूँ, तुम भी बदल लेना।। अगर मैं कुऐ मे गिरूँ, तुम भी गिर लेना ।।

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Mehta Hasmukh Amathalal 13 August 2020

Poem: 58965746 - बात मिसाल की.. Bat Member: Sharad Bhatia Comment: गुरु जी सादर प्रणाम, , फिर से बहुत प्यारी कविता अरे, इंसान हो, कोई तो जानवर नहीं, थोड़ा दिमाग तो लगाओ ।। काहे, बे- दिमाग की बात करते हो, होड़ - होड़ मे काहे को मरते हो।

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Sharad Bhatia 13 August 2020

गुरु जी सादर प्रणाम, , फिर से बहुत प्यारी कविता सोच अगर मैं बदलूँ, तुम भी बदल लेना।। अगर मैं कुऐ मे गिरूँ, तुम भी गिर लेना ।। अरे, इंसान हो, कोई तो जानवर नहीं, थोड़ा दिमाग तो लगाओ ।। काहे, बे- दिमाग की बात करते हो, होड़ - होड़ मे काहे को मरते हो।

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Mehta Hasmukh Amathalal 13 August 2020

मुझे नहीं मिली तो तेरे को भी नहीं लेने दूंगा मर जाऊंगा और मार भी दूंगा डॉ जाडीआ हसमुख

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Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
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