एक नारी.. Ek Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

एक नारी.. Ek

Rating: 5.0

एक नारी
बुधवार। ८ जुलाई २०२०
5: 42 AM

में हूँ एक नारी
सब के जीवन को मैंने तारी
सारा जग है आभारी
क्योंकि हम नारी है उसकी प्रभारी।

हमें गर्व है नारीशक्ति पर
गर्व से आगे बढ़ते है हमारे पैर
नही कोई मिला सकता आँखे
क्योकी मने ही है उनको परखे।

हम भले ही हो मिटटी के पुतले
पर कितने मिट जाते है दिलजले
कुचले जाते है हमारे पाँव तले
क्योंकि हमारी नजरो में वो नहीं उतरे खरे।

हमारा अपमान
सृष्टि का अवमान
जहाँ मान नहीं वहां शांति नहीं
पुरे विश्व को समझना यही।

हमारी कोख से कला मनुष्य
हमारे प्रेम से ही बढ़ता उसका आयुष्य
हमारी अवमानना उसे डुबो देगी
संसार में उसे कहीं भी जगा नहीं मिलेगी।

हमसे है गर्वान्वित संसार
मिल जाना चाहिएआपको आसार
मनुष्य जीवन का यही है सार
समजोगे तो हो जाएगा भवपार।

हसमुख मेहता

एक नारी.. Ek
Tuesday, July 7, 2020
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Varsha M 07 July 2020

Such. Beautiful ode to womenhood. Thank-you so much Sir for painting. This beautiful picture of a woman. It is really beautiful.

0 0 Reply

हमसे है गर्वान्वित संसार मिल जाना चाहिएआपको आसार मनुष्य जीवन का यही है सार समजोगे तो हो जाएगा भवपार। हसमुख मेहता

0 0 Reply
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
Close
Error Success