एक ज़माना
Saturday, August 29,2020
12: 12 PM
गुजर गया वो भी तो था एक ज़माना
बुना गया था नजदीकी तानाबाना
याद कर के जी रहे है बन के तमाशबीन।
ना भूल सके है उसे आजदीन
अब करने की कुछ चाह नहीं
जो हो गया उसके लिए आह नहीं
नयी राह अब पसंद करनी है
रौशनी अब खुद ढूंढनी है।
अंधरे से हमें गीला नहीं
उजाले में हमें कुछ मिला नहीं
खुली आँखे रखकर भी हम भटक़ गए
गुलशन में थोड़ा सा खिलकर भी आप महक गए।
महज सोचने का अंतर है
मत है और मतान्तर भी है
मन मे कड्वाहट है और गीला भी
फिर भी रूतबा रखे है अपना भी।
भले ही पुराने ज़माने से ताल्लुक रखते है
पर नए जमाने के साथ-साथ चलते है
प्यार का रूप बदल गया है और रंग भी
पर अंगडाहट तो अंग मेंरही है अब भी।
हाय, हेलो ने जगा लेली है, है जी, होजी
पहले तो हम रहते थे मौजी
पीते थे खुश होकर हम शिकंजी
जगह तो ले ली है अब व्हिस्की ने विदेशी।
कस्मे, वादे तो वो ही है
बस निभाने का फर्क है
ना चाहकर भी हो जाती है मारामारी
छोटी-छोटी बातें मुश्किलें करती है भारी।
दिल वोही और आसमान भी वहीहै
समंदर का तूफ़ान और धरती की ओढ़नी भी वही है
अदा वही और अदाकारा भी वही
हम सही और वो भी सही।
डॉ जाड़िआ हसमुख
अदा वही और अदाकारा भी वही हम सही और वो भी सही। डॉ जाड़िआ हसमुख
Although we have not got nothing in light still darkness has not engulfed us. We have adjusted with time and grown a much. An amazing poem is very deeply penned.
This poem has not been translated into any other language yet.
I would like to translate this poem
Date & Time: 8/29/2020 5: 28: 00 PM Remove this comment Poem: 59071454 - एक ज़माना.. Ek Member: Kumarmani Mahakul Comment: Although we have not got nothing in light still darkness has not engulfed us. We have adjusted with time and grown a much. An amazing poem is very deeply penned.