फांसी दो, फांसी दो... Fansi Poem by Mehta Hasmukh Amathaal

फांसी दो, फांसी दो... Fansi

Rating: 5.0

फांसी दो, फांसी दो
गुरूवार, १ अक्टूबर २०२०

एक ओर बली चढ़ गई
गंगामैया की गोद में समा गई
जीवन लगने लगा है नीरस
घटना हो गई हो हाथरस।

प्रभु कृष्णा की जन्मभुमि
हम कहते है हर-हर नमामि
हो गई है पाप की भूमि
यादवों को मौत समी समय यादवास्थली।

पाप पुकार के बोल रहा
सदा निर्दोषो की जान लेता रहा
माता चीख चीखकर पुकार रही
मेरी बच्ची का अंतिम संस्कार से वंचित रही।

उसीमाँ की कोख तुम्हारा जन्म हुआ
आपके इस कर्म से वह श्रापित हुआ
आप कैसे जानोगे माँ का दर्द?
आपने पार कर दी है सब हद!

मेरे शब्द ही श्राप है
आपने किया बड़ा पाप है
जीवनभर नहीं धो पाओगे!
अपने दिल को भी नहीं समजा पाओगे।

श्रापित धरती श्रापित मनुष्य
आपका घट जाएगा आयुष्य
आपने अक्ष्यम्य अपराध किया है
फांसी ही इसका इलाज है।

जहां नारी असहाय है
और जुल्म की बोलबाला है
वहां का अंत बड़ा बुरा होगा
जीवन के अंतकाल तक भुगतना होगा।

डॉ जाडीआ हसमुख

फांसी दो, फांसी दो... Fansi
Thursday, October 1, 2020
Topic(s) of this poem: poem
COMMENTS OF THE POEM
Mehta Hasmukh Amathalal 01 October 2020

Poem: 59293933 - फांसी दो, फांसी दो... Fansi Member: Sharad Bhatia Comment: गुरु जी सादर प्रणाम, आज एक बलि और चढ़ गई, मेरे धरती मैया की गोद मैली हो गई।। सुनो अहिल्या तलवार उठाओ, तुम भी नर संहार कर जाओ।। काट दुष्टों के सिर, तुम भी दुर्गा काली बन दिखाओ।। आभार आपका बहुत - बहुत जो आपने अपनी इतनी सुन्दर कविता से हम सब को सोचने पर मजबूर कर दिया

0 0 Reply
Sharad Bhatia 01 October 2020

गुरु जी सादर प्रणाम, आज एक बलि और चढ़ गई, मेरे धरती मैया की गोद मैली हो गई।। सुनो अहिल्या तलवार उठाओ, तुम भी नर संहार कर जाओ।। काट दुष्टों के सिर, तुम भी दुर्गा काली बन दिखाओ।। आभार आपका बहुत - बहुत जो आपने अपनी इतनी सुन्दर कविता से हम सब को सोचने पर मजबूर कर दिया

0 0 Reply
Mehta Hasmukh Amathalal 01 October 2020

वहां का अंत बड़ा बुरा होगा जीवन के अंतकाल तक भुगतना होगा। डॉ जाडीआ हसमुख

0 0 Reply
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Mehta Hasmukh Amathaal

Mehta Hasmukh Amathaal

Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India
Close
Error Success