आदमी की औकात Gaya Prasad Anand Poem by Gaya Prasad Anand 'Anand Gondavi'

आदमी की औकात Gaya Prasad Anand

आदमी आम होता हैं आदमी ख़ास होता है,
आदमी के लिये ही आदमी बकवास होता है।
आदमी की नहीं सुनता जब कोई इस जमाने में,
निराशाओं का मारा वो सूखा घास होता है ॥

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