जीवन संगिनी Poem by Gaya Prasad Anand 'Anand Gondavi'

जीवन संगिनी

अगर आपके पास
अपनी नारी है
तो ये दुनियाँ है
दुनियाँदारी है
अगर कोई नर
बिना नारी है
तो ये मत समझना की
वो अखंड ब्रह्मचारी है
अगर किसी के जीवन मे
कोई दूसरी नारी है
तो समझ लेना की वो
पक्का व्यभिचारी है
अगर नाराज़ अपने
पति से कोई नारी है
तो समझ लेना की उसे
शक की बीमारी है
अगर पत्नी खुश है
तो पति के जीवन मे
प्रेम है विश्वास है
खुशियाँ सारी है
नहीँ तो दुख है
पीडा है लाचारी है ।
हर पत्नी अपने पति पर
सदा भारी है
पत्नी लक्ष्मी है
पति उल्लू है
उल्लू ही तो
लक्ष्मी की सवारी है ।

गया प्रसाद आनन्द
(आनन्द गौंडवी)
#9919060170

जीवन संगिनी
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